सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 18)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत १८

فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ 18 ١٨

अतः जब हम उसे पढ़े तो उसके पठन का अनुसरण कर, (१८)

तफ़सीर
अतः जब हमारे संदेष्टा जिबरील उसे आपके सामने पढ़ें, तो आप उसके पठन को कान लगाकर सुनें और ख़ामोश रहें।

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