सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 1)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत १
لَا أُقْسِمُ بِيَوْمِ الْقِيَامَةِ
नहीं, मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन की, (१)
तफ़सीर
अल्लाह ने क़ियामत के दिन की क़सम खाई है, जिस दिन लोग सर्व संसार के पालनहार के सामने खड़े होंगे।
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