सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 24)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत २४

وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ بَاسِرَةٌ 24 ٢٤

और कितने ही चेहरे उस दिन उदास और बिगड़े हुए होंगे, (२४)

तफ़सीर
और काफ़िरों तथा दुर्भाग्यशाली लोगों के चेहरे उस दिन बिगड़े हुए होंगे।

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