सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 25)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत २५

تَظُنُّ أَنْ يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ 25 ٢٥

समझ रहे होंगे कि उनके साथ कमर तोड़ देनेवाला मामला किया जाएगा (२५)

तफ़सीर
उन्हें विश्वास होगा कि उनपर बड़ी सज़ा और दर्दनाक यातना उतरने वाली है।

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