सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 26)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत २६

كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ 26 ٢٦

कुछ नहीं, जब प्राण कंठ को आ लगेंगे, (२६)

तफ़सीर
मामला वैसा नहीं है, जैसा मुश्रिकों ने समझ लिया है कि जब वे मर जाएँगे तो उन्हें यातना का सामना नहीं होगा। जब तुममें से किसी का प्राण उसके सीने के ऊपरी भाग (हँसली) तक पहुँच जाएगा।

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