सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 2)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत २

وَلَا أُقْسِمُ بِالنَّفْسِ اللَّوَّامَةِ 2 ٢

और नहीं! मैं कसम खाता हूँ मलामत करनेवाली आत्मा की (२)

तफ़सीर
तथा अल्लाह ने अच्छी आत्मा की क़सम खाई है, जो इनसान को अच्छे काम में कोताही करने पर और बुरे कामों के करने पर मलामत (निंदा) करती है। अल्लाह ने इन दोनों चीज़ों की क़सम खाकर कहा है कि वह लोगों को हिसाब और बदले के लिए ज़रूर पुनर्जीवित करेगा।

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