सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 32)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत ३२

وَلَٰكِنْ كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ 32 ٣٢

लेकिन झुठलाया और मुँह मोड़ा, (३२)

तफ़सीर
लेकिन उसने रसूल के लाए हुए संदेश को झुठलाया और उससे दूर हो गया।

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