सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 35)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत ३५
ثُمَّ أَوْلَىٰ لَكَ فَأَوْلَىٰ
फिर अफ़सोस है तुझपर और अफ़सोस है! (३५)
तफ़सीर
फिर अल्लाह ने बल देने के लिए इस वाक्य को दोहराया। चुनाँचे फरमाया : ''फि तेरे लिए विनाश है, फिर तेरे लिए बर्बादी है।''
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