सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 36)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत ३६

أَيَحْسَبُ الْإِنْسَانُ أَنْ يُتْرَكَ سُدًى 36 ٣٦

क्या मनुष्य समझता है कि वह यूँ ही स्वतंत्र छोड़ दिया जाएगा? (३६)

तफ़सीर
क्या इनसान यह समझता है कि अल्लाह उसे शरीयत का बाध्य किए बिना यूँ ही बेकार छोड़ देगा?!

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