सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 4)

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75 अल-क़ियामह(القيامة), आयत ४

بَلَىٰ قَادِرِينَ عَلَىٰ أَنْ نُسَوِّيَ بَنَانَهُ 4 ٤

क्यों नहीं, हम उसकी पोरों को ठीक-ठाक करने की सामर्थ्य रखते है (४)

तफ़सीर
क्यों नहीं? हम उनको एकत्र करने के साथ-साथ, उसकी उँगलियों की पोरों को पहले की तरह बिलकुल ठीक करने की भी शक्ति रखते हैं।

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