सूरह अल-क़ियामह (क़ियामत (पुनरुत्थान) — القيامة) (आयत 5)
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अल-क़ियामह(القيامة), आयत ५
بَلْ يُرِيدُ الْإِنْسَانُ لِيَفْجُرَ أَمَامَهُ
बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे ढिठाई करता रहे (५)
तफ़सीर
बल्कि इनसान मरणोपरांत दोबारा उठाए जाने का इनकार करके यह चाहता है कि वह आगे भी किसी रोक-टोक के बिना कुकर्म करता चला जाए।
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