सूरह अबस (भौंह सिकोड़ना — عبس) (आयत 17)

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80 अबस(عبس), आयत १७

قُتِلَ الْإِنْسَانُ مَا أَكْفَرَهُ 17 ١٧

विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है! (१७)

तफ़सीर
धिक्कार है काफिर इनसान पर, वह अल्लाह का कितना कृतघ्न है!

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