सूरह अल-इन्शिक़ाक (विदीर्ण होना — الإنشقاق) (आयत 14)

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84 अल-इन्शिक़ाक(الإنشقاق), आयत १४

إِنَّهُ ظَنَّ أَنْ لَنْ يَحُورَ 14 ١٤

उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है (१४)

तफ़सीर
उसने सोचा था कि वह अपनी मृत्यु के बाद जीवन में वापस नहीं आएगा।

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