सूरह अल-इन्शिक़ाक (विदीर्ण होना — الإنشقاق) (आयत 19)

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84 अल-इन्शिक़ाक(الإنشقاق), आयत १९

لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَنْ طَبَقٍ 19 ١٩

निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है (१९)

तफ़सीर
(ऐ लोगो!) तुम निश्चित रूप से एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे; एक नुत्फ़ा से जमा हुआ रक्त, फिर गोश्त का टुकड़ा, फिर जीवन, फिर मृत्यु और फिर मरणोपरांत पुनर्जीवन।

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