अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो (२१)
तफ़सीर
(ऐ रसूल) आप इन लोगों को नसीहत करें और इन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ, क्योंकि आप केवल नसीहत करने वाले हैं। आपको केवल उन्हें नसीहत करने के लिए कहा जाता है। जहाँ तक उन्हें ईमान की तौफ़ीक़ देने की बात है, तो वह केवल अल्लाह के हाथ में है।
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