सूरह अल-फ़ज्र (प्रभात — الفجر) (आयत 18)

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89 अल-फ़ज्र(الفجر), आयत १८

وَلَا تَحَاضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ 18 ١٨

और न मुहताज को खिलान पर एक-दूसरे को उभारते हो, (१८)

तफ़सीर
तथा तुम उस ग़रीब को भोजन कराने के लिए एक-दूसरे से आग्रह नहीं करते हो, जिसके पास खाने के लिए कुछ नहीं होता।

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