सूरह अल-फ़ज्र (प्रभात — الفجر) (आयत 24)

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89 अल-फ़ज्र(الفجر), आयत २४

يَقُولُ يَا لَيْتَنِي قَدَّمْتُ لِحَيَاتِي 24 ٢٤

वह कहेगा, "ऐ काश! मैंने अपने जीवन के लिए कुछ करके आगे भेजा होता।" (२४)

तफ़सीर
वह बड़े अफ़सोस के साथ कहेगा : ऐ काश! मैंने अपने इस आख़िरत के जीवन के लिए नेक कार्य किए होते, जो वास्तविक जीवन है।

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