सूरह अल-फ़ज्र (प्रभात — الفجر) (आयत 26)

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89 अल-फ़ज्र(الفجر), आयत २६

وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُ أَحَدٌ 26 ٢٦

और कोई नहीं जो उसकी जकड़बन्द की तरह बाँधे (२६)

तफ़सीर
और न उसके काफ़िरों को ज़ंजीरों में बाँधने की तरह कोई बाँधेगा।

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