सूरह अल-फ़ज्र (प्रभात — الفجر) (आयत 4)

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89 अल-फ़ज्र(الفجر), आयत ४

وَاللَّيْلِ إِذَا يَسْرِ 4 ٤

साक्षी है रात जब वह विदा हो रही हो (४)

तफ़सीर
और रात की क़सम खाई है, जब वह आए, चले और प्रस्थान करे। इन क़समों का जवाब यह है कि : तुम अपने कर्मों का अवश्य बदला दिए जाओगे।

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