सूरह अत-तौबा (तौबा (पश्चाताप) — التوبة) (आयत 20)

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9 अत-तौबा(التوبة), आयत २०

الَّذِينَ آمَنُوا وَهَاجَرُوا وَجَاهَدُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنْفُسِهِمْ أَعْظَمُ دَرَجَةً عِنْدَ اللَّهِ ۚ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْفَائِزُونَ 20 ٢٠

जो लोग ईमान लाए और उन्होंने हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में अपने मालों और अपनी जानों से जिहाद किया, अल्लाह के यहाँ दर्जे में वे बहुत बड़े है और वही सफल है (२०)

तफ़सीर
जो लोग ईमान लाए तथा कुफ़्र की भूमि से इस्लाम की भूमि की ओर हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में अपने धनों और प्राणों के साथ जिहाद किया, उनका दूसरों की तुलना में अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ा पद है, तथा इन गुणों से सुसज्जित यही लोग जन्नत पाने में सफल होने वाले हैं।

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