और वास्तव में हमारे अधिकार में है आख़िरत और दुनिया भी (१३)
तफ़सीर
निःसंदेह हमारे ही अधिकार में आख़िरत का जीवन और हमारे ही अधिकार में सांसारिक जीवन है। हम जो कुछ भी चाहते हैं, उनमें करते हैं और यह अधिकार हमारे अलावा किसी और को नहीं है।
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