सूरह अल-लैल (रात्रि — الليل) (आयत 19)

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92 अल-लैल(الليل), आयत १९

وَمَا لِأَحَدٍ عِنْدَهُ مِنْ نِعْمَةٍ تُجْزَىٰ 19 ١٩

और हाल यह है कि किसी का उसपर उपकार नहीं कि उसका बदला दिया जा रहा हो, (१९)

तफ़सीर
वह अपना माल इसलिए नहीं खर्च करता कि उसपर किसी का उपकार है, जिसे वह चुकाना चाहता है।

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