सूरह अद-दुहा (प्रभात का उजाला — الضحى) (आयत 6)

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93 अद-दुहा(الضحى), आयत ६

أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًا فَآوَىٰ 6 ٦

क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया? (६)

तफ़सीर
उसने आपको इस अवस्था में पाया कि आप छोटे थे एवं आपके पिता की मृत्यु हो चुकी थी, तो उसने आपके लिए एक आश्रय स्थल बना दिया, जहाँ आपके दादा अब्दुल मुत्तलिब, फिर आपके चाचा अबू तालिब ने आपके साथ सहानुभूति व्यक्त की।

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