सूरह अल-क़द्र (मूल्य / नियति — القدر) (आयत 1)

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97 अल-क़द्र(القدر), आयत १

إِنَّا أَنْزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ 1 ١

हमने इसे क़द्र की रात में अवतरित किया (१)

तफ़सीर
हमने क़ुरआन को एकबारगी दुनिया के आकाश (निचले आकाश) पर रमज़ान के महीने में क़द्र की रात में अवतरित किया, इसी तरह उसे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारने की शुरूआत भी इसी रात में की।

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