सूरह अल-क़द्र (मूल्य / नियति — القدر) (आयत 5)

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97 अल-क़द्र(القدر), आयत ५

سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ 5 ٥

वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक (५)

तफ़सीर
यह बरकत वाली रात उसके शुरू होने से लेकर फ़ज्र के उदय होने पर उसके अंत तक सर्वथा भलाई ही भलाई है।

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