सूरह अल-बैय्यिना (स्पष्ट प्रमाण — البينة) (आयत 4)

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98 अल-बैय्यिना(البينة), आयत ४

وَمَا تَفَرَّقَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ إِلَّا مِنْ بَعْدِ مَا جَاءَتْهُمُ الْبَيِّنَةُ 4 ٤

हालाँकि जिन्हें किताब दी गई थी। वे इसके पश्चात फूट में पड़े कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ चुका था (४)

तफ़सीर
यहूदी जिन्हें तौरात दिया गया था और ईसाई जिन्हें इंजील दिया गया था, वे अल्लाह के उनकी ओर अपने नबी को भेजने के बाद ही अलग हुए थे। चुनाँचे उनमें से कुछ ने इस्लाम धर्म अपना लिया और उनमें से कुछ अपने नबी की सच्चाई जानते हुए भी अपने कुफ़्र पर क़ायम रहे।

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