सूरह अज़-ज़लज़ला (भूकंप — الزلزلة) (आयत 3)

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99 अज़-ज़लज़ला(الزلزلة), आयत ३

وَقَالَ الْإِنْسَانُ مَا لَهَا 3 ٣

और मनुष्य कहेगा, "उसे क्या हो गया है?" (३)

तफ़सीर
और इनसान हैरान होकर कहेगा : क्या बात है कि धरती हिल रही है और काँप रही है?!

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