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सूरह अन-नहल — आयत 30 (हिन्दी) — वीडियो

अन-नहल • आयत 30 में से 128 • हिन्दी


وَقِيلَ لِلَّذِينَ اتَّقَوْا مَاذَا أَنْزَلَ رَبُّكُمْ ۚ قَالُوا خَيْرًا ۗ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا فِي هَٰذِهِ الدُّنْيَا حَسَنَةٌ ۚ وَلَدَارُ الْآخِرَةِ خَيْرٌ ۚ وَلَنِعْمَ دَارُ الْمُتَّقِينَ 30
अनुवाद:
दूसरी ओर जो डर रखनेवाले है उनसे कहा जाता है, "तुम्हारे रब ने क्या अवतरित किया?" वे कहते है, "जो सबसे उत्तम है।" जिन लोगों ने भलाई की उनकी इस दुनिया में भी अच्छी हालत है और आख़िरत का घर तो अच्छा है ही। और क्या ही अच्छा घर है डर रखनेवालों का! अन-नहल १६:३०
तफ़सीर:
और उन लोगों से, जो अपने रब के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर उससे डरते रहे, कहा गया : तुम्हारे पालनहार ने तुम्हारे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर क्या उतारा है? तो उन्होंने उत्तर दिया : अल्लाह ने उनपर बहुत बड़ी भलाई उतारी है। जिन लोगों ने अच्छे तरीक़े से अल्लाह की इबादत की और उसकी सृष्टि के साथ अच्छा व्यवहार किया, उनके लिए इस सांसारिक जीवन में उत्तम बदला है, जैसे विजय और रोज़ी में विस्तार। जबकि अल्लाह ने आख़िरत में उनके लिए जो बदला तैयार कर रखा है, वह दुनिया में मिलने वाले बदले से कहीं उत्तम है। और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरने वालों का घर अर्थात् आख़िरत का घर क्या ही खूब है।
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