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सूरह अन-नहल — आयत 31 (हिन्दी) — वीडियो

अन-नहल • आयत 31 में से 128 • हिन्दी


جَنَّاتُ عَدْنٍ يَدْخُلُونَهَا تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ لَهُمْ فِيهَا مَا يَشَاءُونَ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْزِي اللَّهُ الْمُتَّقِينَ 31
अनुवाद:
सदैव रहने के बाग़ जिनमें वे प्रवेश करेंगे, उनके नीचे नहरें बह रहीं होंगी, उनके लिए वहाँ वह सब कुछ संचित होगा, जो वे चाहे। अल्लाह डर रखनेवालों को ऐसा ही प्रतिदान प्रदान करता है अन-नहल १६:३१
तफ़सीर:
वे निवास और स्थिरता के बागों में प्रवेश करेंगे, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बह रही होंगी। उन्हें उन बाग़ों में खाने-पीने आदि की वे सारी चीज़ें मिलेंगी, जिनकी वे इच्छा प्रकट करेंगे। इसी तरह का बदला, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के समुदाय के भय रखने वाले लोगों को देगा, पिछले समुदायों के भय रखने वाले लोगों को भी देगा।
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