जिस दिन वे फ़रिश्तों को देखेंगे उस दिन अपराधियों के लिए कोई ख़ुशख़बरी न होगी और वे पुकार उठेंगे, "पनाह! पनाह!!" अल-फुरक़ान २५:२२ ⧉
तफ़सीर:
जिस दिन काफ़िर लोग फ़रिश्तों को देखेंगे अपनी मौत के समय, क़ब्र की ज़िंदगी में, दोबारा जीवित किए जाते समय तथा उस समय जब वे हिसाब-किताब के लिए धकेलकर ले जाए जाएँगे और जब वे जहन्नम में डाले जाएँगे- तो इन सभी स्थितियों में उनके लिए कोई अच्छी खबर नहीं होगी। जबकि ईमान वालों का मामला इसके विपरीत होगा। तथा फ़रिश्ते उन अपराधियों से कहेंगे : अल्लाह की ओर से तुम्हें कोई खुशख़बरी मिलने वाली नहीं है।