निश्चय ही तुम उस बात में पड़े हुए हो जिनमें कथन भिन्न-भिन्न है अज़-ज़ारियात ५१:८ ⧉
तफ़सीर:
निश्चय (ऐ मक्का वालो!) तुम एक विरोधाभासी और परस्पर विरोधी बात में पड़े हो। कभी तुम कहते हो : क़ुरआन जादू है, तो कभी कहते हो कि काव्य (शे'र) है। इसी तरह कभी कहते हो कि मुहम्मद जादूगर हैं, तो कभी कहते हो कि कवि (शा'इर) हैं।