और अल्लाह की क़सम! इसके पश्चात कि तुम पीठ फेरकर लौटो, मैं तुम्हारी मूर्तियों के साथ अवश्य् एक चाल चलूँगा।" (५७)
तफ़सीर
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने इस तरह से कहा कि उनकी जाति के लोग उसे न सुनें : अल्लाह की क़सम! मैं अवश्य ही तुम्हारी मूर्तियों के प्रति ऐसा उपाय करूँगा, जो तुम नापसंद करोगे, इसके बाद कि तुम उन्हें छोड़कर अपने उत्सव में चले जाओगे।
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