सूरह अश-शुअरा (कवि — الشعراء) (आयत 186)

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26 अश-शुअरा(الشعراء), आयत १८६

وَمَا أَنْتَ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَا وَإِنْ نَظُنُّكَ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ 186 ١٨٦

और तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है और हम तो तुझे झूठा समझते है (१८६)

तफ़सीर
तथा तू तो हमारे ही जैसा एक साधारण इनसान है। इसलिए तुझे हमपर कोइ श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है। फिर तू रसूल कैसे हो सकता है? और तू जो यह रसूल होने का दावा कर रहा है, इसमें हम तुझे झूठा समझते हैं।

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