सूरह अज़-ज़ुखरुफ़ (सजावट — الزخرف) (आयत 15)

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43 अज़-ज़ुखरुफ़(الزخرف), आयत १५

وَجَعَلُوا لَهُ مِنْ عِبَادِهِ جُزْءًا ۚ إِنَّ الْإِنْسَانَ لَكَفُورٌ مُبِينٌ 15 ١٥

उन्होंने उसके बन्दों में से कुछ को उसका अंश ठहरा दिया! निश्चय ही मनुष्य खुला कृतघ्न है (१५)

तफ़सीर
मुश्रिकों ने दावा किया कि कुछ जीव महिमावान सृष्टिकर्ता (अल्लाह) से पैदा हुए हैं, जब उन्होंने कहा : फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। निश्चय ही ऐसा कहने वाला व्यक्ति स्पष्ट कृतघ्न और गुमराह है।

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