"और हमारे लिए इस संसार में भलाई लिख दे और आख़िरत में भी। हम तेरी ही ओर उन्मुख हुए।" उसने कहा, "अपनी यातना में मैं तो उसी को ग्रस्त करता हूँ, जिसे चाहता हूँ, किन्तु मेरी दयालुता से हर चीज़ आच्छादित है। उसे तो मैं उन लोगों के हक़ में लिखूँगा जो डर रखते और ज़कात देते है और जो हमारी आयतों पर ईमान लाते है (१५६)
तफ़सीर
हमें उन लोगों में से बना दे, जिन्हें तूने इस जीवन में नेमतों और शांति से सम्मानित किया है और सत्कर्म की तौफ़ीक़ दी है, और आख़िरत में अपने उन नेक बंदों में से बना दे, जिनके लिए तूने जन्नत तैयार कर रखी है। निःसंदेह हमने तेरे समक्ष पश्चाताप किया और हम अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए वापस आए हैं। इसपर अल्लाह ने फरमाया : मैं दुर्भाग्य के कारणों को अपनाने वाले लोगों में से जिसे चाहता हूँ, अपनी यातना से ग्रस्त करता हूँ, और मेरी दया इस दुनिया में हर चीज़ को व्याप्त है; अतः कोई भी प्राणी नहीं है परंतु अल्लाह की दया उसके पास पहुँच गई है और उसके अनुग्रह और उपकार ने उसे घेर रखा है। इसलिए मैं आख़िरत में अपनी दया को उन लोगों के लिए लिख दूँगा, जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर डरते हैं, और जो अपने धन की ज़कात उसके हक़दारों को अदा करते हैं और जो हमारी निशानियों पर विश्वास रखते हैं।
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